Monday 30 March 2015

Problem.... definition cause & solution

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Problem….
Definition, cause and solution.


Problem is very common thing now days. We hardly find a person without problem. Few of us is suffering from relationship problem, few is worried about their financial problem, few of us is facing health problem etc...

There is no end of problem.

But what is problem actually??

Anything what we desire and don’t get the same it creates problem .If we define problem in mathematical terms then

Problem = Expectation – Actual.

According to this we always have high expectation but we don’t receive the same. This is the only reason because of which   we are into the problem every time. Whenever this equation arrived we are into problem.

Actually problem is a psychological term it arrives because of our thinking .If we are into problem that doesn't mean everything in our life is not moving in right direction. Its always one thing out of many things which is not moving according to us.

          Try to identify the one and work on it .For example ….  A   man who is very happy in his personal life. Everyone in his family loves him a lot, he is happy with his wife, he is having good relationship with his friends, family & colleagues but he is not satisfied with his job, he is unable to fulfil the expectation of his boss because of which he is frustrated .Over a period of time he is showing his frustration to his near and dear one.

Don’t do this?? 

Because of your job don’t disturb your entire life. Job is only one thing in your life there is lots of thing more or equally important than job. Try to give your hundred percent to fulfil the expectation of your boss, or else change your job.

In above example, if he will short out his professional problem, his life become full of joy and happiness. 

Whenever we are into problem, try to identify the reason &work on it. I am sure we all have the ability to solve the problem what we need a formula to solve the equation. Don’t disturb your entire world because of a single reason. There are lots of reason to smile find it. Life is beautiful live it. 

Face the problem chase the problem always try to erase the problem..

If you like this post please put your valuable comments.

Thanks…
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Friday 27 March 2015

"JOURNEY" says

JOURNEY” says………
                                     
    
Run together, live together Bridge the gap, come closer Asked your self ever ??? Do you live forever ???


सफर”  तीन अक्षरों के मेल से बना एक शब्द हैं. जिसके हर एक अक्षर मे  एक सन्देश छुपा है, जो हमसे ये कहते है......

स – साथ चलो, सबको लेकर चलो
फ - फासले मिटाओ
र - राह (मंजिल) आसान हो जाएगी

अर्थात सफर हमसे कहता हैसाथ चलो फासले  मिट जाएंगे और राहे खुद बखुद आसान हो जाएंगी ”.

जब हम कोई सफर शुरु करते है तो हमे पहले से पता होता है की शुरुआत कहाँ से करनी है और कहाँ जा के सफर को विराम देना है . अर्थात हमे हमारा गंतव्य पता होता है. ज्योज्यो हम आगे बढते है , फासले कम होने लगते हैं और मंजिल करीब होने लगती है


वास्तविक जीवन का सफर  भी ऐसा ही होता है जिसकी शुरुआतजन्महै और गन्तव्यमौतहै. जीवन की शुरुआत माँ की गोद मे होती है ,फिर धीरे धीरे हम बड़े होने लगते है , तालीम हासिल करते है और मंजिल की तलाश मे हम अपने आप को पूरी तरह समर्पित कर देते है, क्योंकि जीवकोपार्जन के लिय मंजिल का होना बहुत जरूरी  है. समय के साथ हमे अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार मिल जाता है ,या हम अपने खुद का व्यवसाय शुरू कर लेते है .हमे मंजिल तो मिल जाती है परन्तु अपनों का साथ काफी पीछे छुट जाता है. हमारा जीवन एक दायरे मे सिमट के रह जाता है. पुराने दोस्त, करीबी रिश्तेदार जीवन के इस सफर में काफी पीछे छुट जाते है. जो कभी हमारे साथ और काफी खास हुआ करते थे, अब हमारे आस पास भी नही होते . हमारे बीच का फासला बढ़ता चला जाता है, किन्तु हमे इसकी परवाह नही होती.

जन्म लेके तेरी गोद में
जीवन जीना है मुझे भूलोक में.... 
आगे चलू या संग चलू 
कैसे जिऊ मैं इस लोक में ??

क्या हम अपने जीवन को "सफर" के बताए मार्ग पे चल के नही जी सकते ? क्या मंजिल को पाने की चाह मे अपनों को भूल जाना उचित है?? क्या हम अपनी व्यस्तता मे से थोड़े से समय अपने परिजनों के लिए नही निकाल सकते??
आखिर हम क्यों और किसके लिए अपनों का त्याग कर रहे है ? उनसे दूरियां बढ़ा रहे है, ज्यादा पाने की चाहत हमे अपनों से दूर क्यों कर रहा है?


क्या ऐसा नही हो सकता की हमे मंजिल भी मिल जाये और हमारे बीच कोई फासले भी ना आये. “सफर” के कथन के अनुसार साथ चलने से फासले कम हो जाते है और मंजिल करीब आ जाती है . हम जानते है की हम एक सफर पे है जिसकी शुरुआत  “जन्म” से हो चुकी है और हमारा गंतब्य क्या है ??  हम तो बस समय के साथ उन फसलो को कम कर रहे है. अब जबकि हमे आगाज और अंजाम दोनों पता है तो क्यों न हम सफर में मिलने वाले हर साथी को प्यार दे, क्यों न हम दूरियां मिटाने का काम करे, क्यों ना हम प्यार और सदभाव का वातावरण अपने चारो ओर उत्पन्न करे , क्यों दिलो के बीच दूरिया लाये, क्यों हम किसी से भेदभाव रखे ??


हम क्यों नही पूछते अपने आप से की क्या मैं सदा जीवित रहूँगा ? क्या मैं जीवन रूपी इस सफर का हिस्सा सदैव रहूँगा ??


जबाब हमेशा नकारात्मक ही होता है.....

हम हमेशा सफर मीठी यादों के साथ खत्म करना चाहते है .फिर जिन्दगी की सफर मे क्यों इसको भूल जाते है.
                                             
हम आज से अपने व्यस्त जीवन का कुछ पल अपनों के लिय अवश्य निकालेंगे.आज कुछ पल अपने अतीत को दे ,अतीत में छोड़ आये संबंधो को दे. फासलों को मिटाने का संकल्प ले. यकीन माने जीवन को एक नया आयाम मिलेगा , सफर के अंतिम पड़ाव मे आपके आस पास अपनों का साथ होगा.

         प्यार और सदभाव का गीत हम  गुनगुनाएंगे,   

        है कसम हमे हर फासलें मिटाएंगे.      

     साथ चलेंगे जीवन की  राहों पे हम,

            मंजिल को अपने करीब लाएंगे.......




धन्यवाद  !
विशाल

   
                   
             
     
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Sunday 22 March 2015

shadi (marriage)_ begining of a new journey

Shadi (marriage)beginning of a new journey

जीवन की शुरुआत तो वर्षो पहले हुई
एक सफ़र का आगाज तो जन्म के साथ हुआ
सफ़र चलती रही,जिन्दगी गुजरती रही
फिर अचानक से ये नई शुरुआत
          कंहा से गईं ???
सच ही तो हैं सफर के बिच में राही का अचानक से ये कहना की एक नई सफ़र की शुरआत कुछ अटपटा सा लगता है.
                           परन्तु  सच्चाई वो नही जो हमे प्रथम दृस्त्या (नज़र)में लगे ,सच्चाई के कई मायने होते है और सच्चाई को समझने के लिये बातो की गहराई में जाना अति आवश्यक होता है.

   जीवन  - Life is a cycle , where everything comes step by step starting from childhood to second childhood.
                 

  In between these two ,a stage comes where we get married.Now lots of thing we have to understand
1) Why i said marriage is the beginning of a new journey ?
2) Why people get married?
3) Its good or bad for us.
                    
 Starting from the 1st......................

शादी -                                           
                                                        एक बंधन ,एक रिश्ता ,एक वादा  ,एक विश्वास ,
                                        दो जिस्मो का, दो मनो  का सदा सदा के लिय एक हो जाने का अंदाज;
                                        एक अजनबी  के हाथो में अपने जीवन की डोर देने का रिवाज,
                                       एक दूसरे के प्रति समर्पण का वो भाव, खुशियां बिखेरने की वो जज्बात .
         इन तमाम चीजों के मेल से बनता है घर-संसार  जिसकी शादी से होती है शुरुआत...

इस शुरुआत के साथ शुरू होती है एक सफर . इस सफर की यादें कडवी होगी या मीठी निर्भर करता है राही के ऊपर. राह कैसी भी हो अगर हमराही सच्चा हो और अच्छा हो तो सफर सुहाना हो जाता है.
        हम भारत देश में रहते है जन्हा अधिकांशतः शादी के बाद लड़किया अपने पति के घर जाती है. एक ऐसी जगह जंहा उसके  लिये हर चीज, हर व्यक्ति नये होते है.
जंहा आँखों में सपने होते है ,वही अपनों से बिछुड़ने का गम भी होता है .माँ -बाप ,दोस्त,भाई सबको छोड़ के वो अपने पति के बग़िया को महकाने ससुराल की समा में प्रवेश करती है. वो अनजान होती है हर रिश्तो से . दिल में सिर्फ एक ही अरमान लेकर आती है की मै जंहा जा रही हू वंहा प्यार , मोहब्बत की बारिश करू. उसे नही पता होता की कौन अच्छा है और कौन बुरा.वो तो एक कोरे  कागज की तरह होती है. जो कल किसी की बेटी थी, आज किसी की बीबी है,किसी की बहु है और किसी की भाभी है.
फिर क्यों कोई पत्नी अच्छी और कोई बुरी हो जाती है.क्यों कोई बहु अच्छी और बुरी हो जाती है.
               ये हमारा नजरिया है  बल्कि वास्तविकता इससे बिल्कुल परे है. एक कोरे कागज पे कुछ गलत लिखा है तो इसका जिम्मेदार वो कोरा कागज कैसे हुआ ?
कोरे कागज कभी अच्छे या बुरे नहीं होते , वो तो बस कोरे कागज होते है. वो हम है जो इसमे अच्छाई या बुराई का रंग चढाते है.
                     कोरे कागज से  यंहा तात्पर्य रिश्तो से है , चाहे वो कोई भी रिश्ता हो वो कोरे कागज की तरह ही होते है. परन्तु यंहा हम सिर्फ शादी के रिश्तो  की बात कर रहे  है.
रिश्ता एक बीज की तरह होता है.जिस तरह बीज को पहले बोना होता है,फ़िर सीचना पड़ता है फिर प्रतीक्षा करना होता है तब कंही जाकर हमे फल की प्राप्ति होती है, ठीक उसी तरह  हमे रिश्तो को मजबूती प्रदान करने के लिय प्यार और विश्वास रूपी बीज को बोना पड़ता है, उसे निरंतर स्नेह और दुलाड़ से सीचना पड़ता है.परिणामस्वरूप जो फल की प्राप्ति होती है वो         " अटूट बंधन" कहलाती है. जिसमे हमे सिर्फ अच्छाई ही नज़र आती है.
रिश्तो में जब अच्छाई नजर आने लगे तो सफर सुहाना  हो जाता  है और यादें भी सुहानी होती है. इस तरह एक सफर जो शादी से शुरु होती है वो मीठी यादोँ का गुलदस्ता बन जाता है , जो हर दम्पतियो के जीवन को अपनी महक से महका जाती है.

SO begin this journey with positive thoughts. Good Luck............
                                                                                              
                                                                                                           Vishal 


                                                                                                       






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